रविवार, 10 मई 2020

माँ


हे ईश्वर
माँ के बालों की सफेदी
मुझे अच्छी नहीं लगती,
उसके चेहरे की
झुर्रियाँ मिटा दे,
उसका हर ग़म
दे दे मुझे,
उसके चेहरे पे
मुस्कुराहट सजा दे,
उस के चेहरे में
ज़न्नत नज़र आती है मुझे
उसी के कदमों में है
मेरा जहाँ,
उसी की वजह से
मेरा वज़ूद
मैं जो कुछ भी हूँ
वो उसी की दुआ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. माँ को समर्पित शानदार प्रस्तुति.
    सादर

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  2. माँ की समृति को समेटे सुन्दर रचना।

    जवाब देंहटाएं
  3. मैं हर शब्द में आपका एहसास महसूस करता हूँ, क्योंकि हम सब अपने तरीके से माँ को यूँ ही सुरक्षित और खुश देखना चाहते हैं। मैं भी चाहती हूँ कि वक्त उसकी मुस्कान कभी फीकी न करे। हम चाहे जितना बड़े हो जाएँ, माँ की दुआ ही हमें थामे रहती है।

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NILESH MATHUR

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