बुधवार, 22 अप्रैल 2020

प्रेमी हूँ मैं


मैंने देखा है
प्रकृति को बहुत करीब से
शरीक हुई है वो
मेरी खुशियों में,
मैंने महसूस किया है
उसका दर्द
हृदय की गहराइयों से,
मैंने देखा है
बारिश में पेड़ों को झूमते हुए
पौधों को मुस्कुराते हुए
और कोयल को गाते हुए,
मैंने देखा है
कलियों को खिलते हुए
मदहोश हुआ हूँ मैं
फूलों की खुश्बू से,
मैंने देखा है
आसमान मे इंद्रधनुष बनते हुए
पेड़ पौधों के लिए भी
रोया हूँ मैं,
महसूस किया है मैंने
धरती का दर्द
और सुना है
पहाड़ों का रूदन भी,
हाँ मैं प्रेमी हूँ
इस खूबसूरत प्रकृति का
दर्द होता है
जब कोई इसे छेड़ता है
या खराब नज़र से देखता है।

1 टिप्पणी:

  1. प्रेम का खूबसूरत ताना बाना बुनती आपकी ये रचना लाज़बाब हैं ,बस लाज़बाब

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NILESH MATHUR

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