सोमवार, 4 जुलाई 2011

खो गया है चाँद


सितारे हैं परेशान
ना जाने कहाँ 
खो गया है चाँद
हवाओं से कह दो
उड़ा कर ले जाये 
इन बादलों को 
और कहीं
ये जरूर बादलों की
शरारत है!
 

13 टिप्‍पणियां:

  1. बादल भी मचलता है
    चांद को अपनी
    आगोश में लेने के लिए
    इस लिए वो ये ज़ुरत कर बैठा

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  2. वा वाह ...वा वाह !
    शुभकामनायें नीलेश !

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  3. बेहतरीन.
    --------
    कल 06/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी-पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. वाह, नीलेश...क्या बात है.

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  5. वाह...बहुत कमाल की छोटी सी रचना है आपकी...गागर में सागर जैसी...बधाई
    नीरज

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  6. ये बादल की ही शरारत है ... बहुत खूब ...

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  7. शरारती बादल ढांप लेता है चाँद को पर...नही ठहरता चाँद उसकी बाहों में.मचल कर बाहर निकल आता है माँ के आंचल से ज्यूँ नन्हा बालक. और देखता है बाहर की दुनिया. बादलों का चाँद को छुपा लेना नई बात नही.होता रहा है होता रहेगा.

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NILESH MATHUR

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