रविवार, 19 दिसंबर 2010

गुज़ारिश

मेरी मौत पर 
आँसू मत बहाना 
जश्न मनाना,


जिक्र जब भी हो मेरा
तो मुस्कुराना,


याद जब आये मेरी 
तो ठहाके लगाना
मेरी कमी गर महसूस हो 
तो महफ़िल सजाना,


जिक्र जब भी हो मेरा
तो मुस्कुराना, 


तुम चाहे 
भुला दो मुझको
मैं मर कर भी 
भुला ना पाउँगा तुम्हे, 



मैं मर कर भी जिन्दा रहूँगा 
ख्यालों में तुम्हारे
अक्सर आया करूंगा
ख़्वाबों में तुम्हारे,


अब ना सिकवा है किसी से 
ना शिकायत
ना ही बाकी 
कोई आरजू है,


मंजिल करीब 
और करीब आती जा रही है
शुक्रिया उनका 
जो मेरे हमसफ़र रहे,


अब तो 
इक यही गुज़ारिश है मेरी......


कि मेरी मौत पर
आँसू मत बहाना
जश्न मनाना,


जिक्र जब भी हो मेरा
तो मुस्कुराना! 

34 टिप्‍पणियां:

  1. सीख तो सकारात्मक है पर रचना इतनी निराशावादी क्यों ?
    किसी को पता नहीं की कब मंजिल आ जाये ..तब तक मुस्कुराइए ...

    अच्छी प्रस्तुति ..

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  2. ऐसी कवितायें रोज रोज पढने को नहीं मिलती...इतनी भावपूर्ण कवितायें लिखने के लिए आप को बधाई...शब्द शब्द दिल में उतर गयी.
    "माफ़ी"--बहुत दिनों से आपकी पोस्ट न पढ पाने के लिए ...

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  3. छोटे भाई! जीने की कला सीखते-सीखते यह मौत का आह्वान क्यों?? यह सच है की जीवन और म्रत्यु किसी भी प्राणी के जीवन के दो महापर्व हैं. और इनके आगमन पर उत्सव मनाना उचित है. किन्तु इस प्रकार निराशा से घिरकर उत्सव मनाना उचित नहीं.
    पहले भी कहा था, आज भी कहता हूँ, जीवन अभी समाप्त नहीं हुआ.. बहुत सुन्दर है यह जीवन.इश्वर आपको खुशियाँ दे, और चिरायु भी!!

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  4. .

    कि मेरी मौत पर
    आँसू मत बहाना
    जश्न मनाना,

    bahut khoob !

    .

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  5. इतनी उदासी भरी रचना , भई, हमें तो चिंता होने लगी है सब ठीक तो है न? गुरूजी की बताई साधना तो नियमित करते हैं न आप!

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  6. हमारी ख्वाहिश भी कुछ मिलती जुलती ही समझिये साहब ;)
    लिखते रहिये ...

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  7. यह तो गलत बात है नीलेश ...संगीता स्वरुप जी की सलाह पर गौर करें !
    वैसे रचना के भाव अच्छे लगे ..शुभकामनायें !

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  8. आपकी इस सुन्दर और सशक्त रचना की चर्चा
    आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    http://charchamanch.uchcharan.com/2010/12/375.html

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  9. sunder abhivykti par .............
    Sangeeta ji ne mere man kee baat likh dee hai........
    shubhkamnae.

    meree nayee post update nahee ho paee hai kisee bhee blog par . Shayad system hee naraz hai .

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  10. क्या खूब जज़्बा है…………हर इंसान मे ऐसा ही जज़्बा होना चाहिये।

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  11. mout ke bad to log mhapurusho ko jnmtithi our punytithi pr yad kr lete hai , mgr bhai hum log to bhut sadharn log hai kya hi achchha ho log hme jinda rhte hi mhsoos kre.
    is sadharn ki jmat me shmil hone ka bhi apna hi ek sukh hai isliye aaiye jindgi ko jinda rhte hi dekhne our mhsoos krne ki bat kre .
    anadhikrit hstkshep kr ke aapko bhi sadharn ki jmat me shamil kr diya aasha hai aap maf kr denge .

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  12. सच्चाई है विराम...
    इतनी सहज स्वीकारोक्ति... वाह!

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  13. बहुत खूब ... काश ऐसा हो पाता ... जाने वालों की याद में आंसू ही आते हैं पर ...

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  14. ओह, स्वयं को सांत्वना देती हुई रचना मार्मिक भी लग रही है।

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  15. आप सभी का बहुत धन्यवाद, आप सभी कि टिप्पणियों से मेरे प्रति स्नेह झलकता है, इसलिए एक बात स्पष्ट कर देता हूँ कि मैं निराशावादी नहीं हूँ और ना ही दुखी हूँ, ये सिर्फ एक रचना है!
    @सलिल भैया, मैं जीवन से निराश नहीं हूँ बहुत खुश हूँ!
    @अनीता जी, सब ठीक है और ना ही मैं उदास हूँ, आपका स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखियेगा, हाँ साधना नियमित नहीं हो पा रही!
    @सतीश भैया, सिर्फ संगीता जी ही नहीं मैं तो आप सभी कि बात पर गौर करता हूँ, आप तो बस आशीर्वाद दीजिये!
    @राजवंत राज जी, मैं तो खुद ही एक अदना सा इंसान हूँ, आप को पूरा अधिकार है कुछ भी कहने का, मुझे आप लोगों के मार्गदर्शन की ज़रूरत है!

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  16. mathur saab, shastri ji ke madhyam se aapke yahaan aana hua, kahunga ki vyarth nahi raha, aap bahut achha likhte hain, ye rachna bhi dil se nikli hui lagti hai shaayad....

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  17. badhai, is soch k liye. sundar kavitao se susajjit blog..,shubhkamanayen girish pankaj

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  18. .

    Optimism is very well reflected in the lovely pics of yours.

    Death must be enjoyable and festive as well. Death is an occasion to celebrate because it brings eternal peace and ends all our grievances.

    .

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  19. vajood ki talash ka antim parav ........ maut hi hai .is ko bhi itni khubsurati se ..sath hi muskurate huye kahna achchha laga .aapko sundar rachana keliye badhai

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  20. आपको एवं आपके परिवार को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनायें !

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  21. प्रिय बंधुवर नीलेश जी
    वाऽऽह ! क्या अंदाज़ है !
    अब आपने आश्वस्त कर दिया तो मैं भी निश्चिंत हूं … वरना आप तो हमें लगातार चिंताओं में डाल रहे हैं ।

    रचना अच्छी है ,

    अगली पोस्ट में आपकी नई रचना में जीवन की उमंग, मौज - मस्ती, दिल - विल, प्यार - व्यार की बातें हो जाए ?
    इंतज़ार रहेगा …

    ~*~नव वर्ष २०११ के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं !~*~

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  22. ख्वाहिश अच्छी है मगर पूरी कहाँ होती है..
    अपनों की जुदाई रुलाती ही है.

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  23. apanon ko yad karne ka andaz bahut pasand aaya.koi kaise bhula sakta hai apko ,jise aapne apane se zyada pyar dija.hamare jai log,ya yun kahun aap jaise log jo apano kee yad men jivan guzarne taiyar hai, usakee yad kee koi sanee nahee---
    aaz yad kya aai unakee
    kabr se uthkar aansu bahane kage.

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  24. बहुत भावभीनी और सुन्दर अभिव्यक्ति| धन्यवाद|

    जवाब देंहटाएं

NILESH MATHUR

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