Sunday, August 1, 2010

जिन्ना को उनका पकिस्तान मिला नेहरु को हिन्दुस्तान





क्या नहीं सोचा था 
नेहरु और जिन्ना ने
कि ये कीमत चुकानी होगी 
आज़ादी और विभाजन की,


नालियों में बह रहा 
बेकसूरों का रक्त था
और वो बेकसूर नहीं जानते थे 
कि सरहद किसे कहते हैं
और आज़ादी क्या है,


वो नहीं जानते थे 
नेहरु और जिन्ना को,


वो तो मार दिए गए
हिन्दू और मुसलमान होने के 
अपराध में,


मरने से पहले देखे थे उन्होंने
अपनी औरतों के स्तन कटते हुए
अपने जिंदा बच्चों को 
गोस्त कि तरह आग में पकते हुए,


दुधमुहे बच्चे
अपनी मरी हुई माँ की 
कटी हुई छातियों से बहते रक्त को 
सहमे हुए देख रहे थे 
और उसकी बाहों को 
इस उम्मीद में खींच रहे थे 
कि बस अब वो उसे गोद में उठा लेगी, 


माएँ अपनी जवान बेटियों के
गले घोट रही थी 
उन्हें बलात्कार से बचाने के लिए,


बेरहमी कि हदों को तोड़कर 
इंसानियत को रौंदा गया,


पर एक सवाल आज भी 
अपनी जगह कायम है
कि इस भीषण त्रासदी का 
ज़िम्मेदार कौन???


जिन्ना को 
उनका पाकिस्तान मिला
नेहरु को 
हिन्दुस्तान,


परन्तु बाकी बचे 
चालीस करोड़ लोगों को
क्या मिला???


टुकड़ों में बंटा
लहुलुहान हिन्दुस्तान!!!

28 comments:

  1. बहुत गहरी अभिव्यक्ति है...

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  2. बिल्कुल सही कहा यही मिला 40 करोड लोगों को

    टुकड़ों में बंटा
    लहुलुहान हिन्दुस्तान!!!

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  3. टुकड़ों में बंटा
    लहुलुहान हिन्दुस्तान!!


    और उसे लूटने वाले मुट्ठी भर हैवान!!!

    -बेहतरीन गंभीर रचना!

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  4. वाह! ऐसी कवितों से जीने की उर्जा मिलती है.
    ..आभार.
    बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  5. ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.

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  6. परन्तु बाकी बचे, चालीस करोड़ लोगों को, क्या मिला !! अगर इन स्वार्थी लोगो को चालीस करोड जनता की थोड़ी सी भी फ़िक्र होती तो आज ये लहुलुहान देश की जगह एक खुशहाल देश होता.

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  7. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति !

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  8. क्या आपने हिंदी ब्लॉग संकलन के नए अवतार हमारीवाणी पर अपना ब्लॉग पंजीकृत करा लिया है?

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  9. आपकी रचना ने मेरे रोंगटे खडे कर दिये……………………ये कहना तो रचना का अपमान होगा कि बहुत अच्छी है क्यूँकि आपने तो हकीकत बयाँ की है और शायद दिल मे सुलगते शोलों को भी हवा दी है।इस दर्द के साथ जो जी रहे हैं उनकी आत्मा पर पडे घावों पर शायद कुछ मरहम लग जाये मगर सच से कब तक मूँह मोडा जा सकता है।

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  10. बहुत सुन्दर लिखा है आपने ! उम्दा प्रस्तुती!
    मित्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ!

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  11. अच्छी पोस्ट ।

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  12. aapki ye kvita chitr kavy hai[picture poetry ]
    uy lga jaise pura ghtnakrm aakho ke samne ghtit ho rha ho .beshk ghtna hmesha ke liye drd de dai hai lekin prstuti me nveenta hai .
    sngrhneey post .

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  13. ई बिसय हमरे पैदा होने से पहिले का है, बस किताब में पढे हैं... लेकिन जेतना पढे हैं ओतना आज भी हम रोए हैं...मण्टो का टोबा टेकसिंह हमरे अंदर बईठा हुआ है... इस्लिए इस बिसय पर हम कुछ नहीं बोलते हैं, बस आँसू बहाते हैं… अब ई आँसू ऊ लोग के लिए है जो दुनो तरफ क़त्ल हुआ अऊर आजो हो रहा है...
    सियासत दुस्मनी का जख्म भरने ही नहीं देती
    जहाँ भरने पे आता है कि मक्खी बैठ जाती है.
    (हमरा नम्बर 098107 15727)

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  14. आवारा बादल ने की सुलगती बरसात!
    वो स्याह समय जो किताबों और फिल्मों में ही देखा है, साकार हो गया फ़िर से.....
    हे इश्वर! हिन्दू और मुसलमान होना, फ़िर कभी अपराध ना हो!

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  15. परन्तु बाकी बचे
    चालीस करोड़ लोगों को
    क्या मिला???


    टुकड़ों में बंटा
    लहुलुहान हिन्दुस्तान...

    बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ||.शानदार.

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  16. bahut bhavpoorn prastuti............

    aapka prashn jimmedaar koun ?

    jawab nadarad bus hai moun .

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  17. पड़कर काफी अच्छा लगा ..... आपकी सोच, समझ, भावना, व भावुकता का बहुत अच्छा चित्रण...

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  18. सच घटे या बढे तो सच न रहे,सच को बयान करना भी एक कला है।।।।।।
    बहुत खूब्!

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  19. जिन्ना हों या नेहरु, वे भी उसी विरासत को लेकर जन्मे थे,इतिहास एक व्यक्ति से नहीं बनता, नेहरु की आत्मकथा पढ़ी है आपने, मुझे लगता है भावुक होकर नहीं हमें तटस्थ होकर घटनाओं को परखना चाहिए.

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  20. अनीता जी,
    धन्यवाद टिप्पणी करने के लिए, देश विभाजन के ज़िम्मेदार नेहरु जी और जिन्ना ही थे ये एक कटु सत्य है, और इस निर्णय के चलते गाँधी जी और नेहरु जी में भी मतभेद पैदा हो गया था, अगर विभाजन नहीं होता तो कभी इतना खून खराबा नहीं होता और शायद आज भी हिन्दू और मुसलमान भाईचारे से रहते, और विशाल भारत एक बहुत बड़ी शक्ति होता, नेहरु जी की आत्मकथा में आप को नेहरु जी का पक्ष ही पढने को मिलेगा! कुछ गलत लगे तो क्षमाप्रार्थी हूँ!

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  21. vibhajan ki trasdi ko badi bariki se ukera hai aapne!awesome!!

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  22. Aapke blog par aaker achha lagaa. Apki ye rachna bahut hi achhi aur sarthak hai.

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  23. नीलेश माथुर जी
    नमस्कार !
    हमारे जन्म से पहले की भयावह दुर्घटना " विभाजन " को ले'कर आपने ऐसा सजीव , मर्मस्पर्शी चित्रण किया है , कि रोंगटे खड़े हो जाएं ।
    टुकड़ों में बंटा
    लहुलुहान हिन्दुस्तान!!!

    … एक विचारणीय कविता के लिए बधाई !

    आपका इंतज़ार था , आपके फोन के बाद …
    शायद व्यस्तताओं के चलते नहीं आ पाए होंगे ।
    कोई बात नहीं , इस बार बीकानेर पधारें तो पूर्वसूचना के बाद मिलें ।


    शस्वरं पर आपका हमेशा हार्दिक स्वागत है , आइए , आते रहिए …

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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  24. मुझे लगता है विभाजन के लिये ब्रिटिश भी जिम्मेदार थे जिन्होंने साम्प्रदायिक पार्टियों को बढ़ावा दिया, हिदू महासभा हो या मुस्लिम लीग इसके नेता अपनी खिचड़ी अलग पकाते रहे, उन्होंने कभी गांधीजी का साथ नही दिया.

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  25. Md. Jinnah, at the last stage of his life (1948), said to his doctor that "Creation of PAKISTAN was his Biggest Mistake of Life"...

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NILESH MATHUR

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