Sunday, August 29, 2010

मौन.........

उनके शब्द बाण
मेरा ह्रदय भेद रहे थे
परन्तु मेरे मौन से
आतंकित हो
वो अपने तरकश को
कंधे से उतार कर
फेंक देने पर बाध्य हुए,
मेरे मौन कि शक्ति ने
उनके शब्द बाणों का
मानो अस्तित्व ही मिटा दिया,
तब मैंने जाना
मौन सदा शब्दों को
परास्त कर मुस्कुराता है
और शब्द
मौन के आगे नतमस्तक हो
शीश झुकाते हैं!

14 comments:

  1. गहरा बात!! आध्यात्मिक अनुभव!!!
    अपने अंदर मौन कादीपक जलाना एक अनुभव है जिसमें सारा जीवन अहुत हो जाता है...नीलेस भाई,आशीष!!

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  2. वाह! अत्यंत सुन्दर रचना! बहुत ही गहरे भाव के साथ आपने उम्दा रचना लिखा है जो काबिले तारीफ़ है!

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  3. बहुत गहरी बात ...वैसे भी एक चुप सौ को हराती है

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  4. Bahut hi gahri baat kah di hai sir aapne.... vo kahate hain n ki----------

    Ek chup sau ko haraata hai.

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  5. bahut sundar rachna....kuchh hi shabdon me aapne gahari baat kah di.

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  6. गहन चिंतन.................मौन में बहुत कुछ गहरा छिपा होता है........

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  7. मौन सदा शब्दों को
    परास्त कर मुस्कुराता है
    और शब्द
    मौन के आगे नतमस्तक हो
    शीश झुकाते हैं!

    kaphi arthpurn aur sundar abhivyakti.badhai.

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  8. आपको एवं आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

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  9. सही है माथुर साब, एक चुप सौ को हरावे!
    आशीष
    --
    अब मैं ट्विटर पे भी!
    https://twitter.com/professorashish

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  10. nilesh ji
    mukhur chup ne hmesha aakrshit kiya hai .
    vo phool sa hlka bhi hai our chttaan sa vjni bhi . . shbd bolte hai our moun bina bole bhed kholte hai .aapki kvita ko uttam pryas na kh kr behtreen prstuti khu to jyada behtr hoga .

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  11. sahi kaha aapne

    maa kahti hai .........ek chup sau ko harata hai

    bahut khoob adaygii

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  12. सही कहा है, मौन में सच्चा सुख है !

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NILESH MATHUR

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