Monday, May 3, 2010

आवारा बादल !

आज कुछ पंक्तियाँ लिखते लिखते अपने ब्लॉग का नाम भी बदल दिया कैसा लगा बताइयेगा ज़रूर !


आवारा बादल हूँ
जब चाहूँ
आसमान में छा जाऊ,


बस इक चाहत है


अपनी आवारगी
बंजर भूमि पर दिखलाऊ !

18 comments:

  1. वाह क्या बात लिखी है
    बहुत सुन्दर

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  2. छोटा है पर असरदार है... सुन्दर भाव...

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  3. aise hi samarpit bhav chahiye Neelesh ji.. naam naya achchha laga.

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  4. भाई निलेश जी ,
    वन्दे!
    पहले तो ब्लाग का नाम बदलने की बधाई!भाई,आपको आवारगी इतनी भी क्या भाई कि ब्लाग का नाम बदलने की नोबत आई?आवारा बादल कहीँ भी बरस सकते हैँ।उन्हे नियंत्रित कर बंजर धरा पर बरसाना बहुत कठिन काम है।अब आप स्वघोषित आवारा बादल हैँ अतः कभी हमारे राजस्थान मेँ आ बरसना।धरा बहुत बंजर है यहां । आमीन !

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  5. नया नाम एकदम मस्त है जी, और आवारा बादल की कामना महान है। आपके ब्लॉग पर पहले भी आता रहा हूं, तस्वीरें बहुत अच्छी हैं।
    तस्वीरें भी बहुत अच्छी हैं, ये कहना ठीक रहेगा।

    नये नामकरण पर बधाई, नाम catchy है। जमेगा।

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  6. बरसे तो बात बने...बढ़िया.

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  7. waqy me bahut khub


    bahut bahut badhai

    shekhar kumawat

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  8. हमेशा की तरह आपकी रचना जानदार और शानदार है।

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  9. अब ई आवारगिए त है कि बिना बरसे चल जाते हैं, किसान ताकते रह जाता है कि अल्ला मेघ दे!! एगो मसहूर सायर का सायरी ठोकते हैं
    गरज बरस प्यासी धरती को, फिर पानी दे मौला
    चिड़ियों को दाना, बच्चों को गुड़्धानी दे मौल..
    अपका भी कबिता बहुत बढिया है..

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  10. कम शब्दों में ..गज़ब की बात ,...शानदार

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  11. वाह! नीलेश, ये तो एक सुन्दर अगीत है। अगीत -अतुकान्त कविता की एक विशिष्ट विधा है, जो सन्क्षिप्तता व तीब्र भाव सम्प्रेषणता के साथ, ५ से १० पन्क्तियों मे सिमटी रहती है।---बधाई.

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  12. सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.

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  13. gagar mein sagar .

    gahre insan hi sagar ki tah se bhaav or shabd utha ke late hai

    bandhaii swikaren

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NILESH MATHUR

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