Wednesday, June 29, 2016

लौट कर आऊँगा

ध्यान, साधना, सत्संग 
से कोसों दूर
कंक्रीट के जंगल में
सांसारिक वासनाओं 
और अहंकार तले
आध्यात्म रहित वनवास
भोग रहा हूँ इन दिनों,
मैं फिर से लौट कर आऊँगा 
जानता हूँ की तुम मुझे 
माफ करोगे 
और सहर्ष स्वीकार भी करोगे। 

2 comments:

  1. हर किसी को भोगना है ये वनवास तो ... जीवन के कर्म हैं ....

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  2. पेट का सवाल जो सामने होता है

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NILESH MATHUR

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