Wednesday, June 15, 2016

लिखने के लिए बाज़ुओं में ताक़त चाहिए और जिगर भी..




लिखने के लिए 
बाज़ुओं में ताक़त चाहिए और जिगर भी,
वर्ना कलम तो हरेक के पास है।
खाली जा सकता है वार तलवार का 
और बंदूक की गोली भी दे सकती है धोखा 
पर बहुत गहरा है वार कलम का 
सीधे जिगर पर वार करती है कलम ,
बंदूक थामी है तुमने 
तो जरूर तुम्हारे बाजुओं में 
ताक़त होगी और जिगर भी, 
फिर क्यों बन्दूक हाथ में ले रखी है तुमने 
कलम ही काफ़ी है इनके लिए 
जिनसे तुम लड़ रहे हो।  


4 comments:

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति सुरैया और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

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  2. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 17/06/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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  3. Nice post, things explained in details. Thank You.

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NILESH MATHUR

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