Saturday, January 11, 2014

जब से पीने लगा हूँ मैं



पीने लगा हूँ अब 
शराब मैं
ना गम है अब
ना दर्द का एहसास है, 
जीने लगा हूँ अब
जब से पीने लगा हूँ मैं
ना उनकी याद आती हैं अब
ना ख्वाबों मे सताती है वो,
जब से पीने लगा हूँ मैं
जी भर के जीने लगा हूँ मैं। 

3 comments:

  1. पर यह उपाय तो क्षणिक ही है.कुछ स्थायी खोजना चाहिए.

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  2. वाह,अति सुन्दर

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  3. एक भ्रम में जिए जा रहा हूँ मैं
    कहने को जिन्दा हूँ ..
    बस अपने होने का अहसास ढोये जा रहा हूँ मैं...
    पर कब तक ?

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NILESH MATHUR

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