Sunday, February 13, 2011

गोडसे अब भी याद है मुझे


इतिहास में 
बड़ा कमजोर हूँ मैं
हुमायूँ का बाप  
और शाहज़हान का बेटा 
याद नहीं मुझे,


मुझे तो याद है
बाबर की बर्बरता
और औरंगजेब की 
साम्प्रदायिकता,


कभी कभी 
याद आते हैं मुझे 
बहादुर शाह ज़फर
और उनके शेर,   


याद है मुझे 
वो झूठे सूरमा
जो अंग्रेजों और मुग़लों के
तलवे चाटते थे, 


याद है शहादत 
भगत और आज़ाद की
सुभाष भी अक्सर 
याद आते हैं मुझे,  



नेहरु मुझे 
कसाई नज़र आते हैं 
और जिन्ना 
जिन्न की तरह 
याद आते हैं, 


भूल चुका हूँ मैं
रक्त रंजित इतिहास,


लेकिन हाँ....
गोडसे अब भी 
याद है मुझे
जिसने एक युग का
अंत किया
सही या गलत 
मैं नहीं जानता..............

20 comments:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (14-2-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  2. saarthak................

    godse ka kritrya kritya tha ya apkritya............aaj tak prashn hi bana hua hai..........

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  3. याद है मुझे
    वो झूठे सूरमा
    जो अंग्रेजों और मुग़लों के
    तलवे चाटते थे,

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  4. लेकिन हाँ....
    गोडसे अब भी
    याद है मुझे
    जिसने एक युग का
    अंत किया
    सही या गलत
    मैं नहीं जानता.............hmmm, sochnewali baat hai

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  5. विचारणीय..सही या गलत!!

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  6. एक सटीक अर्थ को संप्रेषित करती आपकी यह रचना इतिहास और वर्तमान का जीवंत दस्तावेज है

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  7. लेकिन हाँ....
    गोडसे अब भी
    याद है मुझे
    जिसने एक युग का
    अंत किया
    सही या गलत
    मैं नहीं जानता.............

    बहुत सार्थक और भावों को उद्वेलित करने वाली प्रस्तुति..

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  8. behadddd hee khoobasoorat aur sampoorn rachna ! Neelesh ji is rachna par badhai..aabhar !

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  9. याद रखना ही इस युग की पहली आवश्यकता है

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  10. बढ़िया और यथार्थ परक चोट की है, शुभकामनायें !

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  11. ve sabhi pal yaad rahate hain, jo kuchh bura ya achchha gathit hone ke liye nishchit kiye jate hain.

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  12. सच्चाई बयां करतीं लाजवाब यादें ।

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  13. गोडसे को भुला जा भी नहीं सकता ... भुला जाना भी नहीं चाहिए !

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  14. तो नेहरु को आप माफ़ नहीं ही कर सकते !

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  15. विचारणीय ,बहुत सार्थक प्रस्तुति......

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  16. सचमुच इतिहास की परतें खोलने पर न जाने कितने सुलगते हुए राज़ उभर आते हैं

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  17. लेकिन हाँ
    गोडसे अब भी
    याद है मुझे
    जिसने एक युग का
    अंत किया
    सही या गलत
    मैं नहीं जानता

    बहुत ही विचारप्रवण कविता है।

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NILESH MATHUR

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