Sunday, February 6, 2011

क्षणिकाएँ

(1)
शमा रात भर जलती रही
रात बेरहम ढलती नहीं
भोर की किरणों ने
बहुत देर कर दी
ना जाने कितने परवाने जल मरे!


(2)
सर्दियों की रात 
बन गयी है
ज़िन्दगी मेरी
लम्बी और लम्बी 
होती जा रही है!


(3)
शायद मौत 
ज़िन्दगी से 
ज्यादा खूबसूरत 
होती होगी,
वरना कोई 
क्यों मरता बेमौत!


(4)
निगाहों से 
क़त्ल करते हैं वो 
और बाइज्ज़त बरी
हो जाते हैं!


(5)
उजड़े हुए चमन का
एक फूल हूँ मैं
माली भी देख कर
नज़रें चुरा लेता है अब!


(6)
मेरी कब्र पे
शमा मत जलाना
मुझे अँधेरे से
मुहब्बत है!


(7)
मुझे कब्र में
चैन से सोने देना
ओ महबूबा मेरी
मैं तेरी नाजो अदा से
तंग आ चुका हूँ!


(8)
चाँद ने 
घूँघट उठा कर
जब देखा ज़मी को
हुस्न बिखरा था
हर तरफ!



25 comments:

  1. शायद मौत
    ज़िन्दगी से
    ज्यादा खूबसूरत
    होती होगी,
    वरना कोई
    क्यों मरता बेमौत!
    kya baat kahi hai !

    ReplyDelete
  2. निगाहों से
    क़त्ल करते हैं वो
    और बाइज्ज़त बरी
    हो जाते हैं!

    यही तो अदा होती है हुस्न की………………बहुत सुन्दर क्षणिकायें।

    ReplyDelete
  3. नीलेश माथुर जी!
    आज अचानक आपके ब्लाग पर आना हुआ। कई प्रस्तुतियाँ पढ़ी। जीवन के चटक और फीके दोनों प्रकार के भावों का समावेश है इन रचनाओं में। प्रभावकारी लेखन के लिए बधाई। कृपया पर्यावरण और बसंत पर ये दोहे पढ़िए......
    ==============================
    गाँव-गाँव घर-घ्रर मिलें, दो ही प्रमुख हकीम।
    आँगन मिस तुलसी मिलें, बाहर मिस्टर नीम॥
    -------+------+---------+--------+--------+-----
    शहरीपन ज्यों-ज्यों बढ़ा, हुआ वनों का अंत।
    गमलों में बैठा मिला, सिकुड़ा हुआ बसंत॥
    सद्भावी - डॉ० डंडा लखनवी

    ReplyDelete
  4. शायद मौत
    ज़िन्दगी से
    ज्यादा खूबसूरत
    होती होगी,
    वरना कोई
    क्यों मरता बेमौत!

    क्या खूब...बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  5. bahur sundar ...mathur ji...
    har ek kshnika lajwab..

    ReplyDelete
  6. …बहुत सुन्दर क्षणिकायें।

    ReplyDelete
  7. .शब्दों को चुन-चुन कर तराशा है आपने ...प्रशंसनीय रचना।
    कुछ दिनों से बाहर होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका
    माफ़ी चाहता हूँ

    ReplyDelete
  8. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (7/2/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

    ReplyDelete
  9. चाँद ने
    घूँघट उठा कर
    जब देखा ज़मी को
    हुस्न बिखरा था
    हर तरफ!

    ...सारा जहां खूबसूरत है!
    अच्छी क्षणिकाएं ...धन्यवाद

    ReplyDelete
  10. each word is loaded with philosophical meaning..nice one.

    ReplyDelete
  11. खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

    ReplyDelete
  12. बड़ी सुन्दर क्षणिकाएं ... क्या बात है...

    ReplyDelete
  13. क्षण भर में चमकी और सब कुछ कह गई.
    वाह. अनुपम प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  14. nilesh ji...............aapki saari kshnikaayein ek se badh kar ek hain.

    bahut bahut badhaai.......

    ReplyDelete
  15. खूबसूरत अभिव्यक्ति,सुन्दर क्षणिकाएं

    ReplyDelete
  16. aaj bas yunhi sabke blog dekhne nikli thi aur yahan bhi aakarthehar gayi..bahut sunder blog hai aapka.

    मेरी कब्र पे
    शमा मत जलाना
    मुझे अँधेरे से
    मुहब्बत है!

    bahut guftagu ki din ke ujalon main sabse,
    ab andheron main khud se rubaru hone do.

    ReplyDelete
  17. बहुत सुन्दर क्षणिकाए.... खूबसूरत अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  18. बहुत सुन्दर क्षणिकाए
    जनमदिन की बधाई और शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  19. जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं !!

    ReplyDelete
  20. नीलेश माथुर जी!आदत.. मुस्कुराने की ओर से जन्मदिन की ढेरो शुभकामनाये..

    ReplyDelete
  21. जन्मदिन की बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत ..............बधाई और शुभकामनाएं !!

    ReplyDelete
  22. Happy Birthday 2 u.Happy Birthday 2 u. Happy Birthday 2 Nilesh ji.

    ReplyDelete
  23. sabhi rachnaaon ka alag-alag rang hai...janmdin ki der se hi sahi badhai...sagar main ek lahar uthi etre naam ki..........!!jgd

    ReplyDelete

NILESH MATHUR

Search This Blog

www.hamarivani.com रफ़्तार