Friday, December 31, 2010

अब के बरस

और रक्त नहीं बहेगा  
अमन औ चैन होगा
अब के बरस,
रक्त रंजित इतिहास देख
पाषाण ह्रदय पिघलेंगे
अब के बरस,
बगावत की आंधियां थमेगी
उजड़े हुए चमन खिलेंगे
अब के बरस,
और आँसू नहीं बहेंगे
चेहरों पर मुस्कान रहेगी
अब के बरस,
बेफिक्र बचपन होगा
उमंग भरी जवानी
अब के बरस,
वृद्धजनों के चेहरे पर भी
गर्वीली मुस्कान रहेगी
अब के बरस,
नहीं बिकेंगे जिस्म यहाँ पर
ना होगा कोई चीरहरण
अब के बरस,
इन्द्र करेंगे स्नेह की वर्षा
शीतल होकर सूर्य रहेंगे
अब के बरस,
खेतों की मुस्कान देख
किसान ह्रदय पुलकित होंगे
अब के बरस,
सीना ताने पर्वत होंगे
निर्भय होकर वृक्ष रहेंगे
अब के बरस,
संस्कारों की जीत होगी 
विजयी होगा धर्मं
अब के बरस,
एक नया इतिहास रचेंगे
और रचेंगे नयी कहानी
अब के बरस!!!

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  2. चूँकि अब धीरे-धीरे हम सब एक बिलकुल नए-नवेले साल २०११ में पदार्पण करने जा रहे है,
    अत: आपको और आपके परिवार को मेरी और मेरे परिवार की और से एक सुन्दर, सुखमय और समृद्ध नए साल की शुभकामनाये प्रेषित करता हूँ ! भगवान् करे आगामी साल सबके लिए अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और शान्ति से परिपूर्ण हो !!

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  3. हे आसमान पर रहने वाले... मेरे इस अनुज की हृदय से निकली यह प्रार्थना सुन ले!

    नीलेश! परमात्मा से तुम्हारे लिये मानसिक शांति की प्रार्थना है और तुम्हारे सारेसंताप कटें यही शुभकामना है!!

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  4. बहुत सुनदर अभिव्यक्ति , बधाई व आपको व आपके ब्लाग के सभी साथियों को नववर्ष की शुभकामनायें।

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  5. आपको नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें...स्वीकार करें
    बहुत खूब ...अंदाज -ए- वयां पसंद आया

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NILESH MATHUR

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