Sunday, July 18, 2010

रेतीली आँधियों और लू के थपेड़ों का आनंद

पिछले एक महीने से रेतीली आँधियों और लू के थपेड़ों का आनंद ले रहा था, दरअसल राजस्थान की सैर पर था, तापमान अपने चरम पर था पर फिर भी रेत से मेरे मोह के आड़े नहीं आ पाया, हाँ सभी की तरह सुबह उठते ही आसमाँ की तरफ इस उम्मीद में ज़रूर ताकता था की कहीं बारिश के कोई आसार नज़र आ जाएँ, पर इन्द्र तो आँखों पर शायद धूप का चश्मा लगा कर बैठे है उन्हें इस रेगिस्तान की गर्मी का अहसास नहीं है, मेरे एक मित्र विवेक की सुनाई कुछ पंक्तियाँ अक्सर मुझे याद आती थी............................



"यहाँ नदियों पर
बरसते है मेघ मेरे देश में
और बारिस को
तरसते हैं खेत मेरे देश में"



लेकिन फिर भी मेरा ये टूर बहुत ही शानदार रहा, कुछ पुराने दोस्त और कुछ पुरानी यादों के सुखद अहसास में कब समय व्यतीत हो गया पता ही नहीं चला, बचपन में जिस स्कूल में पढ़ा था देर तक उसके सामने खड़े हो कर उसे निहारता रहता था और एक बार फिर से बचपन में खो जाता था, पुराना शहर जिसकी हवेलियाँ बीकानेर की शान हैं वहां का एक चक्कर रोज़ लगाता था, वहां की शाम शानदार होती है,  इतने दिन रहने के बाद भी बहुत से लोगों से नहीं मिल पाया, और मेरे दिवंगत दोस्त गजेन्द्र की यादों ने बहुत परेशान किया!
अब फिर से ब्लोगिंग शुरु अब आप लोग झेलिये मुझे!

9 comments:

  1. शानदार चित्र और वृत्तांत वर्णन

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  2. सुनाओ अब सचित्र राजस्थान यात्रा का वृतांत!! पुनः स्वागत है वापसी पर.

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  3. kami thi ... ab mansoon shabdon kee fuharen lekar aaya hai

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  4. नीलेस बाबू,कम से कम बता कर त जाते...अचानके अईसे गयब हो गए जईसे दिल्लीसे बारिस...अब आप आ गए हैं, त लग रहा है कि बादल लौट आया है!!!

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  5. nilesh ji aadaab aap bhut raajsthaan aaye or hmaare kota ko nzr andaaz kr chle gye jnaab raajsthaan men aao or kotaa nhin phuncho to aapki yatraa bekaar he aap khte to shi hm aapkaa plk paavnaa bichaa kr intizaar krte yhaan ret ki aandhiyaan nhin lu ke thpede nhin yhaan to chmbl he paani he shiksha he udhyog hen bijli he or bs aapke liyen pyaar hi pyaar he ab aapka intizaar he . akhtar khan akela kota rajsthan

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  6. सुनाओ अब सचित्र राजस्थान यात्रा का वृतांत!! पुनः स्वागत है वापसी पर.

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  7. बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

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  8. Maaf kijiyga kai dino bahar hone ke kaaran blog par nahi aa skaa

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  9. अरे वाह .....मैं भी कहूँ किधर गायब हो गए .........

    अच्छा तो आपका बचपन राजस्थान में बीता .....तो असम कैसे आना हो गया .....?

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NILESH MATHUR

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