Sunday, June 13, 2010

मैं कौन हूँ?

एक प्रश्न 
अक्सर मैं करता हूँ खुद से  
कि मैं कौन हूँ?

अपने अस्तित्व की तलाश में
खुद अपने आप से अपरिचित
हैरान होता हूँ मैं
खुद के मैं पर,

जीने के बहाने ढूंढ़ते हुए भी
मेरा मैं
अस्तित्वहीन सा खड़ा है
सिर उठा कर,

और मैं
मेरे मैं की परतें उधेड़ता हुआ
उलझता जाता हूँ
अपने ही प्रश्न के जाल में!

21 comments:

  1. sundar rachna...is prashn ka uttar paate paate kitne sant hue....

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  2. दुनिया के सबसे मुश्किल सवाल पर बढ़िया कविता..

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  3. बहुत बढ़िया! हम सब इसी प्रश्न से जूझ रहे हैं।
    घुघूती बासूती

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  4. आपके ब्लोग का कलेवर बहुत ही शानदार है मगर गहरे रंग का होने के कारण शायद ये बहुत ज्यादा आरामदेह नहीं है आखों के लिए । रचना बहुत ही उत्तम लगी ..जीवन को बूझने का यत्न करती हुई सी

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  5. जीने के बहाने ढूंढ़ते हुए भी..मेरा मैं अस्तित्वहीन सा खड़ा है..सिर उठा कर../ वही कसक ..सुंदर।

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  6. वाकई ये प्रश्नों के जाल ही तो हैं जो हमें सोने नहीं देते
    खुद को हम कितना जानते हैं?

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  7. The emotions in us, makes us feel that we are alive.Otherwise we are nothing just 'Panch-tatva'.

    The beautiful moments and lovely images in heart are something that makes us feel we are alive. Otherwise we are minuscule and next to nothing.

    Sab Mithya hai !

    Live in moments !....Cherish them.

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  8. ye prashna to sadiyon se poochhte aa rahe hain aur aaj bhi ye anuttarit hai aur shayad hamesha hi rahega. bahut sundar shabdhon men dhala hai.

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  9. ख़ुद की तलाश करती..... बहुत अच्छी पोस्ट....

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  10. हम सब इसी प्रश्न से जूझ रहे हैं।

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  11. बेहतरीन...सभी की कहानी कह दी.

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  12. मेरे मैं की परतें उधेड़ता हुआ
    उलझता जाता हूँ
    अपने ही प्रश्न के जाल में!


    ......बेहतरीन... बहुत अच्छी पोस्ट....

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  13. यदि मनुष्य अपने आप को पहचान ले तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी.

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  14. इस सवाल का जबाब तो कोई नहीं ढूंढ पाया ..परन्तु कविता बहुत सुन्दर है

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  15. और मैं
    मेरे मैं की परतें उधेड़ता हुआ
    उलझता जाता हूँ
    अपने ही प्रश्न के जाल में!
    hum bhatkte hai kyo bhatkate hai aesi raho par ,dhoonde par bhi jahan jawab nahi milte in baaton ke .bahut sundar rachna .

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  16. इस सवाल का जबाब तो कोई नहीं ढूंढ पाया

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  17. जो भी है, .बहुत खूब है.....है न...

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  18. interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this site to increase visitor.Happy Blogging!!!

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  19. बढ़िया कविता..

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NILESH MATHUR

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