Wednesday, November 3, 2010

ये कैसी दीपावली है?

child labour at fireworks factory
आज फिर से 

हम दीपावली मनाएंगे 
जिनके घरों में 
चूल्हे भी नहीं जले
उन्हें शर्मशार करते हुए 
घी के दीप जलाएँगे,

धमाकों की आवाज में
छुप जाएंगा रुदन उनका   
child labour at fireworks factory
और वो भूखे पेट निहारेंगे 
रोशनी से जगमगाते शहर को,

आज फिर से 
हम भूखे नंगों के बीच 
नए कपडे पहन कर निकलेंगे
child labour at fireworks factory
और नोटों के बण्डल 
पटाखों के रूप में जलाएँगे,

कोई बिनब्याही बेटी का बाप
दहल जाएगा इनके धमाकों से
और कोई बच्चा 
हसरत भरी निगाहों से 
निहारेगा फुलझड़ियों को ,

आज फिर से 
हम इन बुझे हुए चेहरों के बीच
दीप जलाएँगे
और दीपावली मनाएंगे,


क्या ये दीप 
The result of making fireworks
उन बुझे हुए चेहरों को 
रोशन कर पाएँगे?


क्या ये दीप 
उन अन्धकार में डूबे घरों को
ज़रा सी रोशनी दिखाएँगे? 


क्या ये दीप 
हमारे अंतर के अन्धकार को 
मिटा पाएंगे ? 


क्या हम सचमुच 
कभी रोशनी में नहाएँगे ?
  

23 comments:

  1. मन व्यथित कर गयी यह कविता..बहुत ही कड़वे सच को सामने लाती हुई कविता है.

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  2. गहरी बात कह दी आपने। नज़र आती हुये पर भी यकीं नहीं आता।

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  3. एक तरफ भूखे नंगे
    जो चुन चुन अन्न खाएंगे
    कूड़े के ढेरो पे बच्चे
    अपना भविष्य बनाएँगे

    ..............कैसी दीवाली मनाएँगे?

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  4. .

    मार्मिक चित्रण !

    .

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  5. shi khaa khin ghtaatop andhera to khin divali he aek maarmik rchnaa ke liyen bdhaayi ho.akhtar khan akela kota rajsthan

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  6. बहुत मार्मिक सोचने पर मजबूर करती प्रस्तुति है ....धन्यवाद
    आपको सपरिवार प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ !!
    उल्फ़त के दीप

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  7. सत्य सदा कटु होता है, हमसे जितना हो सके प्रेम से सहायता करें और खुशी खुशी त्यौहार मनाएं, गुरूजी ऐसा ही तो कहते हैं न !

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  8. दीपावली के इस पावन पर्व पर ढेर सारी शुभकामनाएं

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  9. संवेदनशील कविता .... जवाब तो हमें नहीं मालूम, बस दुआ कर सकते है की सब बच्चा लोग सुरक्षित हो और ख़ुशी से दीपावली माने... बाकी तो साहब, दुनिया है ... बहुत कुछ होता है ..... शुभकामाए ही की जा सकती है और क्या ....

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  10. ise vidambana hi kah sakte hain.sarthak aur safal lekhan.

    diwali ki shubhkamnayen ab kya doon?

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  11. vidambanaon ko saghanta se likha hai!
    shubhkamnayen!

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  12. क्या ये दीप
    हमारे अंतर के अन्धकार को
    मिटा पाएंगे ?


    क्या हम सचमुच
    कभी रोशनी में नहाएँगे ?


    -----
    आपको और आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएँ
    ..
    कभी यहाँ भी आयें
    http://prakashpankaj.wordpress.com

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  13. धमाकों की आवाज में
    छुप जाएंगा रुदन उनका
    और वो भूखे पेट निहारेंगे
    रोशनी से जगमगाते शहर को,

    कोई बिनब्याही बेटी का बाप
    दहल जाएगा इनके धमाकों से
    और कोई बच्चा
    हसरत भरी निगाहों से
    निहारेगा फुलझड़ियों को ,

    आज फिर से
    हम इन बुझे हुए चेहरों के बीच
    दीप जलाएँगे
    और दीपावली मनाएंगे,

    कमाल का लिखते हैं आप निलेश जी...
    भावुक कर दिया रचना ने.
    दीपावली की शुभकामनाओं सहित.

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  14. अँखों मे आँसू आ गये। निशब्द हूँ। आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  15. दिवाली जैसे पावन पर्व पर भी शर्मनाक घटनाएँ होती हैं ।
    बल श्रम एक बाल शोषण है । अति निंदनीय ।

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  16. दिल को कचोटने वाली बात कही है भाई..लेकिन ऐसी तस्वीरें मत लगाया करो..

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  17. इसी तरह आप से बात करूंगा
    मुलाक़ात आप से जरूर करूंगा

    आप
    मेरे परिवार के सदस्य
    लगते हैं
    अब लगता नहीं कभी
    मिले नहीं है
    आपने भरपूर स्नेह और
    सम्मान दिया
    हृदय को मेरे झकझोर दिया
    दीपावली को यादगार बना दिया
    लेखन वर्ष की पहली दीवाली को
    बिना दीयों के रोशन कर दिया
    बिना पटाखों के दिल में
    धमाका कर दिया
    ऐसी दीपावली सब की हो
    घर परिवार में अमन हो
    निरंतर दुआ यही करूंगा
    अब वर्ष दर वर्ष जरिये कलम
    मुलाक़ात करूंगा
    इसी तरह आप से
    बात करूंगा
    मुलाक़ात आप से
    जरूर करूंगा
    01-11-2010

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  18. वाकई मन व्यथित कर देने वाली बात है. खैर आपको दीवाली की शुभ कामनाये

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  19. आप को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
    मैं आपके -शारीरिक स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करता हूँ

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  20. आज फिर से
    हम भूखे नंगों के बीच
    नए कपडे पहन कर निकलेंगे
    child labour at fireworks factory
    और नोटों के बण्डल
    पटाखों के रूप में जलाएँगे,

    निलेश जी ,बहुत अच्छी कवितायेँ लिखने लगे हैं आप ...
    सच्चाई से रूबरू करती नज़्म ....

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  21. माथुर जी , आपका ब्लॉग सुन्दर और सन्देश परक भी है . आपको पढ़ना बहुत अच्छा लगा . शुभकामना ............

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  22. गहन चिंतन युक्त एक भावपूर्ण कृति. इसमें कड़वी सच्चाई भी है. अगर सब लोग समझ लें तो दीवाली को बिना किसी आडम्बर के मनाया जा सकेगा. प्रकाश विहीन बच्चों के जीवन में उजाला करने से बेहतर कोई दिवाली नहीं हो सकती.

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  23. चलो मनाएं अगली दिवाली
    आतिशबाजी या पटाखों से नहीं
    बल्कि बालश्रम मुक्ति से
    और भी सुखमय होगी दिवाली !

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NILESH MATHUR

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