Monday, January 7, 2013

वो बहाते हैं हम पी जाते हैं




उनके पसीने कि कमाई
हम खाते हैं
वो बहाते हैं हम पी जाते हैं
वो दो वक़्त की रोटी को
तरस जाते हैं
और हम पिज्जा बर्गर खाते हैं। 

6 comments:

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति मंगलवार के चर्चा मंच पर ।।

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  2. स्वार्थी हुए जा रहे हैं हम....
    निष्ठुर भी...

    गहन रचना
    अनु

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  3. बहुत अच्छा ...

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  4. baat to bilkul sahi hai....behtreen rachna.

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NILESH MATHUR

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