Sunday, April 22, 2012

अंतिम इच्छा



जिनके चेहरे पर 
हो मुस्कान 
सिर्फ उन्हे ही इजाज़त है 
मेरे जनाजे मे शिरकत की, 
मेरे दोस्तों 
सज धज कर आना 
और हँसते गाते हुए 
उठाना मुझे कंधे पर,
व्यर्थ आँसू मत बहाना 
सिर्फ मुसकुराना, 
मेरे आने पर भी 
मुस्कुराए थे सब 
अब हँसते हुए 
विदा भी करना दोस्तों,  
जिन्हे बहाने हो आँसू
उन्हे इजाज़त नहीं है 
मेरे जनाजे मे 
शिरकत की, 
जिनके चेहरे पर 
हो मुस्कान 
सिर्फ उन्हे ही इजाज़त है 
मेरे जनाजे मे शिरकत की।  

Tuesday, April 10, 2012

क्षणिकाएँ





बेवफाई
उनकी फितरत थी
हम यूँ ही ज़ज्बातों में
बहते रहे!


वो चैन की नींद
सोते रहे उम्र भर
हमने आँखों ही आँखों में
ज़िन्दगी गुजार दी!


हम वफ़ा की
कसमें खाते रहे
और वो
बेवफाई की हद से गुज़र गए!


हम दर्द की कश्ती में
सवार थे
और उन्होंने
पतवार खेने से मना कर दिया!
NILESH MATHUR

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