Friday, March 26, 2010

रिश्ते !

हर रिश्ते को 
कोई नाम न दो 
कुछ बेनाम रिश्ते भी 
जीने का सबब बन जाते हैं,


कुछ रिश्ते निभाने पड़ते हैं 
न चाहते हुए भी 
और कुछ लोग बिन रिश्ते के भी 
दिल के करीब होते हैं,


रिश्तों के लिए तो जीते हैं सभी
पर कुछ लोग 
किसी गैर के लिए 
ज़िन्दगी बिता देते हैं 
और खुद को मिटा देते हैं, 


अपने ज़ख्म को 
सहलाता है हर शख्स 
पर कुछ लोग 
औरों के ज़ख्म सीने पे लिए फिरते हैं, 


बहुत भटकाव हैं 
रिश्तों कि राह में
कुछ लोग ज़िन्दगी बिता देते हैं 
किसी कि चाह में !

7 comments:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. Bahut Sundar rachana lagi aapki ....dhanywad.

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  3. बहुत भटकाव हैं
    रिश्तों कि राह में
    कुछ लोग ज़िन्दगी बिता देते हैं
    किसी कि चाह में !

    -बहुत खूब!

    -

    हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

    अनेक शुभकामनाएँ.

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  4. बेनामी रिश्ते ही जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं क्यूंकि रिश्तों में नाम जुड़ते ही अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं ...
    रिश्तों की खूबसूरती इनके बेनामी होने में ही है ...!!

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  5. व्यवसायी होते हुए भी दिल के मर्म को जानते ही नहीं बल्कि हौले से छू जाते है | रिश्तों को शब्दों में बखूबी पिरोया है कि दिल के गहरे में हलचल मचा दी है |

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  6. Bahut Sundar rachana lagi aapki ....dhanywad.

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  7. बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

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NILESH MATHUR

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