आवारा बादल
आवारा बादल हूँ मैं, कभी यहाँ तो कभी वहाँ, भटकना ही तो फितरत है मेरी.....
सोमवार, 9 नवंबर 2009
महात्मा गाँधी के नाम एक ख़त !
›
पूज्य बापू, सादर प्रणाम, आशा ही नहीं हमें पूर्ण विश्वास है कि आप कुशलता से होंगे। हम सब भी यहाँ मजे में हैं। देश और समाज की स्थिति से आपक...
5 टिप्पणियां:
शनिवार, 7 नवंबर 2009
आस्था
›
कुछ लोग मुसीबत में पड़ने पर ही ईश्वर को याद करते हैं उनके लिए .... जब हताश हो उठता है मन तो बेजान पत्थरों में नज़र आती है उम्मीद कि किरण...
1 टिप्पणी:
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009
गंगा स्नान
›
हरिद्वार में हर कि पौडी पर बैठा था तो कुछ इस तरह के विचार मन में आये थे ! (१) गंगा में डुबकी लगाई पापों से मुक्ति पायी , फिर शुरू होंगे ...
4 टिप्पणियां:
मंगलवार, 20 अक्टूबर 2009
यूँ ही एक दिन !
›
यूँ ही एक दिन चल दूंगा अलविदा कहकर तुम्हें , पर तुम निराश ना होना मेरे होने ना होने से क्या फर्क पड़ता है , सब कुछ यूँ ही चलता रहेगा यू...
3 टिप्पणियां:
सोमवार, 19 अक्टूबर 2009
दीपावली
›
रौशनी के सारे सौदागर दिए जलेंगे आज अंधेरों से लड़ते हुए रौशनी में नहाएँगे आज , पर कुछ लोग अपनी खिड़कियाँ बंद कर लेंगे इन्हें रौशनी म...
1 टिप्पणी:
रविवार, 18 अक्टूबर 2009
शब्द
›
हर बात शब्दों में बयां नहीं होती कुछ दर्द शब्दों से परे होता हैं कुछ खुशियाँ भी शब्दों में नहीं समाती शब्द तो सिर्फ माध्यम है रोज़मर्...
2 टिप्पणियां:
शनिवार, 17 अक्टूबर 2009
मेरी पहली कविता
›
झरोखे से देख रह हूँ मेरे जीवन में खुशियों कि बहार आ रही है असमंजस में है मन कि द्वार खोल स्वागत करूँ या लौटा दूँ इसे हवाओं का रु...
8 टिप्पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें